Saturday, 17 May 2014

Report on Bihar loksabha poll result


मोदी  लहर  में कइयों  की नैया पार लग गयी  जिनमें
 भाजपा के अलोकप्रिय  नेता से लेकर  सहयोगी दल भी थे 

  16 वीं लोकसभा  चुनाव में मोदी लहर से बिहार भी  अछूता नहीं रहा।  बिहार की कुल 40 लोकसभा  सीटों में एनडीए ने  31 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही। जिनमें अकेले  भाजपा ने  22 सीटों पर परचम लहराया। वहीं  मोदी लहर पर सवार होकर एनडीए के दो सहयोगी; लोक जनशक्ति पार्टी  और नवनिर्मित राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी ने अच्छा  प्रदर्शन किया है। चुनाव परिणाम के बाद बिहार की सत्तारुढ  जनता  दल यूनाइटेड   को बड़ा झटका लगा है। हालांकि  लालू की राष्ट्रीय जनता दल  अपनी ठीक-ठाक वापसी की है। वहीं आप का प्रदर्शन बहुत खराब रहा और उसे कई लोकसभा  सीटों पर चौथे-पांचवे स्थान से संतोष करना पड़ा। यहाँ तक आआप, बसपा और वाम दल का प्रदेश में खाता भी  नहीं खुल पाया।


       
कभी भाजपा के साथ रहने वाले नितीश कुमार का नरेंद्र मोदी से
उनके हिन्दू राष्ट्रवादी चेहरे की वजह से अलग होना महंगा पड़ा 
                        पिछले साल सितंबर में भाजपा  के द्वारा अपना प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने के बाद एनडीए से अलग हुए जेडीयू को जबरदस्त धक्का लगा है। चुनाव परिणाम आने के बाद वह केवल दो सीटों पर सिमट कर रह गयी है। पिछले  लोकसभा  चुनाव में 20 सीटें लेकर  जेडीयू राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी ।

                     चुनाव पूर्व वामदलों के नेतृत्व में 11 दलों को मिलाकर बनाई गई 'तीसरा मोर्चा' फिर एक बार फ्लाप रही। जेडीयू और सीपीआई के बीच हुए गठबंधन में जदयू कुल 38 सीटों पर अपना उम्मीदवार ख़ड़े किये थे। वहीं सीपीआई को दो सीटे मिली थी। सीपीआई दोनो सीटों पर तीसरे जगह पर रही।

                        राज्य में लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल  ; एनडीए से  संघर्ष करती नजर आई है। कांग्रेस के साझीदारी में लड़े गये चुनाव में  24 सीटों में चार पर जीत हासिल किया है। जबकि कांग्रेस ने साझीदारी  के तहत मिले  कुल सात सीटों में  दो सीट जीतने में कामयाब रही।  चुनावी समर में लालू की पत्नी और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंघत्री राबड़ी देवी सारण की 'घरेलू सीट' पर हार गयीं। सारण सीट पर उन्हें भाजपा के राजीव प्रताप रुढ़ी ने शिकस्त  दी।  वहीं पाटलीपुत्र पर राजद के पूर्व नेता रामकृपाल की नाराजगी  भारी पड़ी । यहां से लालू की पुत्री मीसा भारती चुनाव लड़ रही थीं।
       
लालू   को  अपनी  खोई  जमींन  मिल सकती  है,
बिहार के पांच  विधानसभा  क्षेत्र में हुए  चुनाव में राजद ने तीन सीट  पर जीत दर्ज की है 
            वहीं पासवान की लोजपा ने  पिता-पुत्र-भाई के  तीनों  पारिवारिक सीट पर जीत हासिल की। हाजीपुर से रामविलास पासवान, जमूई से पुत्र चिराग और समस्तीपुर से पासवान के भाई रामचंद्र पासवान नें  जीत दर्ज कर ली है। पिछले  लोकसभा चुनाव में लोजपा का राज्य में सुपड़ा साफ हो गया था।  एनडीए के साथ समझौते के तहत लोजपा को छह सीट मिली थी। जिनमें  सभी   सीटों पर जीत हासिल कर लोजपा  ने  शानदार वापसी की है।
                 वहीं बिहार में तीन सीटों पर चुनाव  लड़ रही भाजपा की एक और सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के  संस्थापक उपेन्द्र कुशवाहा  अपनी कराकट  सहित  तीनों पर जीत हासिल की है। जदयू से अलग होकर पिछले साल तीन मार्च को कुशवाहा ने अपनी नई पार्टी बनाई थी।

           जदयू के कई बड़े नेताओं को इस चुनाव में  पराजय का मुंह   देखना पड़ा। कभी  एनडीए के संयोजक रह चुके जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तीसरे मोर्चे के प्रमुख रणनीतिकार शरद यादव खुद अपनी मधेपुरा  सीट बचा पाने में कामयाब नहीं रह सके ।  शरद यादव को राजद के राजेश रंजन उर्फ पप्पु यादव ने 56209  वोटों  से पराजित किया।  वहीं मशहूर फिल्म निर्माता प्रकाश झा को दूबारा हार का सामना करना पड़ा ।  इसबार जदयू की टिकट पर पश्चिम चंपारण से चुनाव लड़ रहे प्रकाश झा को भाजपा के संजय जयसवाल से पराजित हुए । वे इससे पहले लोजपा के टिकट पर इसी लोकसभा क्षेत्र से  चुनाव में हार  चुके हैं।

     
चुनाव परिणाम आने के बाद  नीतीश कुमार की मुश्किलें  बढ़ गयी है,
 वे इस्तीफा भी दे सकते हैं 
 जदयू का  मुस्लिम वोटरो को  लुभाने  के लिए भाजपा से अलग होने का दांव सही पड़ता नहीं दिखा। जदयू ने इस लोकसभा  चुनाव में तीन मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किये थे। जदयू  के टिकट पर  शिवहर से शाबिर अली, सारण के शलील परवेज और मधुबनी से चुनाव लड़ रहे गुलाम गौस  में किसी को भी  जीत नहीं मिल पाई। वहीं भागलपुर से चुनाव लड़ रहे भाजपा के एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार शाहनवाज हुसैन  राजद के शैलेश कुमार मंडल से मात्र 9485 वोटों से  पराजित हो गये हैं। हुसैन, वाजपेयी के शासनकाल में केन्द्रीय मंत्री भी  रह चुके हैं। उन्होने पिछली बार इसी सीट से जीत हासिल की थी।
     विवादित बयान देकर फंसे भाजपा के  गिरिराज सिंह नवादा से चुनाव जीत चुके हैं। साथ हीं   सीवान के निर्दलिय वर्तमान सांसद ओमप्रकाश यादव ने भाजपा की टिकट पर दुबारा जीत पाने में सफल रहे।
            वहीं राज्य में मिले वोट फीसदी की बात करें तो यहां भी  भाजपा सर्वाधिक 29 वोट फीसदी वोट हासिल किया।  वहीं राजद ने 20.1 फीसदी वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रही  । जदयू ने 15.8 फीसदी वोट के साथ तीसरी स्थान बना पाने में कामयाब रही।  वहीं नोटा पर 581011 वोटरों ने बटन दबा कर अपना विरोध दर्ज किया।

         
रामविलास पासवान को पाला बदलने से फायदा मिला ,
बिहार की राजनीति  में हासिये  पर जाने क बाद एक बार फिर रामविलास की  उम्मीद जगी है 
आनेवाले दिनों में जदयू की परेशानियां बढ़ सकती है। जीत से उत्साहित रामविलास पासवान ने जदयू के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहते हैें जल्द ही नीतीश की सरकार गिरने वाली है क्योंकि हार को देखकर दर्जनों  विधायक पार्टी छोड़कर जानेवाले हैं।
           यूपीए की केंद्र  सरकार पर एनडीए  नीत  राज्य सरकार  बिहार के प्रति  लगातार  भेदभाव  का आरोप लगाती रही है।  यह अब भी  जारी रहेगी जब भाजपा केन्द्र  में होगी । देखना यह होगा कि विशेष राज्य का दर्जा मांगने में जदयू का सुर मिलाने वाली भाजपा राज्य को यह दर्जा देती है या उठापटक और आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहने वाला है।

हरिभूमि में प्रकाशित

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