Saturday, 18 October 2014

धर्म की दीवार लांघती एक लड़की

जब बडोदरा में दंगे का माहौल था। सूरत में एक लड़की दोबारा अपने पुराने घर में लौटने की तैयारी कर रही थी। मुंबई के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से ग्रेजुएट उस हिन्दू लड़की को एक मुस्लिम परिवार में दोबारा लौटना था।
सूरत का नानपुरा मार्केट; जहां ज्यादातर मुस्लिम परिवार रहते हैं। जिनके पास घर के नाम पर एक तंग कमरा है। दिहाड़ी की नौकरी है। बदहाल जिंदगी और बेबसी भरे दिन हैं। वह उनके बदहाली को दूर करना चाहती थी। बेखबर कि बडोदरा में दंगे का माहौल बना हुआ है।

वह डेढ़ साल तक एक मल्टीनेशनल एडवरटाईजिंग कंपनी में काम कर चुकी थी। डोमिनोज का पिज्जा और बिसलरी का बोतलबंद पानी पीनेवाली लड़की दस बाई दस के छोटे से कमरे में दोबारा लौट रही थी।

यह सिर्फ हिम्मत ही नहीं था; उससे बढ़कर था। हिम्मत तो उसने तब भी दिखायी थी; जब उसने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांधी फैलो को ज्वाइंन किया था। जहां पहले ही बता दिया गया था, स्लम में रहकर काम करना होगा।

मैंनें रुची को पहली बार ऑटो में देखा था। हड़बड़ी में, लेकिन उसने अपना व्हाट्सअप नंबर देना नहीं भूली। शायद यह पब्लिक रिलेशन में पढ़ाई करने का असर था।

महीनों तक बातें नहीं हुई।  पता चला रुची बीमार है। डॉक्टर ने साफ जगह पर रहने की सलाह दी है। उसी रात व्हाटस अप पर मैसेज मिला। कल 11 बजे हेल्थ चेकअप कैंप है। स्कूल नं. 141, नानपुरा आ जाना
 जिसे खुद इलाज की जरूरत है; वह दूसरों का इलाज करवा रही है। 11 बजे मैं स्कूल नंबर 141 में था।

हेल्थ चेकअप कैंप में बच्चों और उनके पैरेंट्स को मनोवैज्ञानिक सलाह देते डॉ. मुर्तुजा
वह कमजोर दिमाग वाले बच्चों की पहचान डॉक्टर से करवा रही है। वह डॉक्टर के पास जमें भीड़ को व्यवस्थित कर रही है। वह एचएम से बात कर रही है। एचएम खुश हैं। उनके स्कूल में कुछ नया हो रहा है। मोहल्लेवालों को पहली बार डॉक्टर साहब से बिना मशक्कत सलाह मिल रही है, वह भी मुफ्त में।

रुची के चेहरे पर संतुष्टी के भाव थे। कैमरे की फ्लैश के बीच जरूर मैनें कई हेल्थ चेकअप कैंप देखे थे। लेकिन ऐसा पहली बार था जब बिना शोरशराबे के डॉक्टर बच्चों के स्वास्थ जांचने में व्यस्त थे।  लेकिन उस बदरंग मोहल्ले में डॉक्टरों को मुफ्त सलाह देने के लिए लाना आसान भी नहीं था।  बेशक डॉक्टरों की टीम को धन्यवाद देना चाहिए। लेकिन जो दिख रहा था वह रुची के प्रयासों का ही नतीजा था।



वह लोगों के बदहाली को दूर करना चाहती थी। उसने लगातार काम किया। उसने अपने काम से घर में ही नहीं, दिलों में भी जगह बनायी। बेखबर कि बडोदरा में दंगे का माहौल है। 
चेकअप कैंप में दांतों की जांच भी हुई। 
रुची के साथ सेल्फी।
हमदोनों  गांधी फैलोशिप से जुड़े हैं।
सूरत में 47 फैलो स्कूली शिक्षा के हालात
बेहतर बनाने में लगे हैं। 

1 comment:

  1. Your blog touches our hearts and makes us to look into reality.

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