मंजीत चार महीने काम
करके अपने गांव लौट गया है। वह आगे पढ़ना चाहता है। मंजीत ने इसी साल मैट्रिक की
परीक्षा पास की है। उसके पिता खेतों में काम करते हैं। उसके हाथ में चाइनिज
स्मार्टफोन है। वह गर्व से बताता है “यह मोबाइल उसने अपनी
कमाई से खरीदी है।“ इस सात इंच के स्क्रिन पर वह हिन्दी और भोजपुरी
फिल्में देख सकता है। गाने सुन सकता है। फोटो ले सकता है। और सबसे बड़ी बात वह 'फेसबुकिया' भी कर सकता है।
उसके फेसबुक पर उसके पसंदिदा हीरो
अक्षय कुमार भी हैं, और उसकी हीरोइन श्रीदेवी भी। कई सितारे तो उसके फ्रेंड भी
हैं, जिससे वह चैटिंग भी कर लेता है। इस बात से बेखबर कि वे प्रोफाइल फेक हैं। उसके
फ्रेंड लिस्ट में कॉलेज में पढ़ने वालों से लेकर उसके पड़ोस का गोलू भी है। लाइक,
कामेंट, चैट के अलावे वह ज्यादातर फोटो शेयर करता है। जिनमें ज्यादातर उसकी खुद की
तस्वीर होती हैं। इसके लिए उसे पांच रुपये रोज खर्च करना पड़ता है। लेकिन उसे
फेसबुक की खूबियों के सामने यह रकम कुछ भी नहीं लगता। हलांकि उसके इस पैक का फेसबुक
ब्राउज के अलावा और कोई उपयोग नहीं है।
फोटो- गूगल
फेसबुक का क्रेजी सिर्फ मंजीत ही नहीं है। यह क्रेज शहरी आधुनिक युवा वर्ग से बढ़कर कस्बों और गांवों में रहने वाले नई पीढ़ी में फैल रहा है। फेसबुक का यह प्रभाव युवा और आधुनिक लोगों के दायरे से आगे निकल रहा है। चाहे वह क्षेत्र की सीमा हो, पीढी का फासला या फिर तकनीक की पहुंच। प्रमुख एंड्राइड डाउनलोडिंग साइट गूगल प्ले में अबतक मोबाइल पर चलने वाली फेसबुक एप्स को 14504123 इतने लोग डाउनलोड कर चुके हैं। सितम्बर 2012 तक 1 बिलियन लोग इससे जुड़ चुके हैं। जिनमें भारत में 93 मिलियन यूजर भारत में हैं।
फेसबुक का क्रेजी सिर्फ मंजीत ही नहीं है। यह क्रेज शहरी आधुनिक युवा वर्ग से बढ़कर कस्बों और गांवों में रहने वाले नई पीढ़ी में फैल रहा है। फेसबुक का यह प्रभाव युवा और आधुनिक लोगों के दायरे से आगे निकल रहा है। चाहे वह क्षेत्र की सीमा हो, पीढी का फासला या फिर तकनीक की पहुंच। प्रमुख एंड्राइड डाउनलोडिंग साइट गूगल प्ले में अबतक मोबाइल पर चलने वाली फेसबुक एप्स को 14504123 इतने लोग डाउनलोड कर चुके हैं। सितम्बर 2012 तक 1 बिलियन लोग इससे जुड़ चुके हैं। जिनमें भारत में 93 मिलियन यूजर भारत में हैं।
इंटरनेट सेवाएं
मुहैया कराने वाली कंपनियां भी उपभोगताओं को फेसबुक के प्रति बढ़ती दिवानगी को भूनाने
के लिए फेसबुक ब्राउज के सीमित उपयोग वाले पैक ऑफर कर रही है।
लेकिन इस दिवानगी के खतरे भी कम नहीं हैं। काम के घंटो में इसके उपयोग से
कर्मचारियों के कार्यक्षमता के प्रभावित होने के तर्क के साथ कई नियोक्ता काम के
समय फेसबुक ब्राउज को प्रतिबंधित कर चुके हैं।
इंटरनेट सूचना और ज्ञान का
महत्वपूर्ण स्त्रोत बनक उभरा है। कई शिक्षण संस्थानों को इंटरनेट उपयोग के घंंटो को
बढाने के लिए फेसबुक ब्राउज को प्रतिबंधित करना पड़ा है। पिछले साल के यूपीएससी के
सफल प्रतिभागियों में ज्यादातर छात्र फेसबुक पर नहीं थे या सक्रिय नहीं थे। लेकिन
सभी छात्रों ने इंटरनेट को अपनी सफलता में अपना महत्वपूर्ण सहयोगी माना।
हाल में इस नीली दुनिया
के संस्थापक मार्क जुकरवर्ग ने फेसबुक के ‘कनैक्टिविटी लैब’ की एक जानकारी शेयर की। जिसमें उन्होंने पूरी दुनिया
में इन्टरनेट सुविधा मुहैया कराने के फेसबुक के महत्वकांक्षी योजना का जिक्र किया है। चाहे जो भी हो फेसबुक के
बहाने गांव का मंजीत भी इंटरनेट की दुनिया से जुड़ रहा है।




