Wednesday, 28 December 2016

हिन्दी का बदलता स्वरूप




पीएलएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 780 भाषाएं बोली जाती हैं। एक बहुभाषी और कई संस्कृतियों वाले देश में संपर्क भाषा हिन्दी ही है। हिन्दी देश की जनभाषा है। यह देश के पढ़े-लिखे से लेकर अनपढ़, अमीर और गरीब के बीच संवाद की भाषा बनी हुई है।

विज्ञान, तकनीक और उच्च शिक्षा में हिन्दी में कम काम होने के बावजूद देश में हिन्दी का प्रसार बढ़ा है। आज बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्यों के युवा दूसरे भाषाभाषी राज्यों में जीविका के लिए निकल रहे हैं। इस हालत में उनके जनसंपर्क की भाषा हिन्दी ही होती है। आज हिन्दी की बदौलत आप कश्मीर से कन्याकुमारी तक काम चला सकते हैं। आज हिन्दी कमोबेश देश के हर हिस्से में स्वीकार्य हो गई है।
 एक सर्वे के मुताबिक 1991 में जहां 180 मिलियन लोग हिन्दी का इस्तेमाल करते थे। वहीं 10 सालों में यह संख्या 258 मिलियन तक पहुंच गयी है। कई विदेशी विश्वविदयालयों में हिन्दी को भाषा के रूप में पढ़ाया जाने लगा है। वहीं विदेशों से हिन्दी सीखने के लिए भारत आने वाले छात्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आज हिन्दी चौथी सबसे लोकप्रिय भाषा बन गई है।
ऐसा हिन्दी भाषा का देश के विभिन्न भाषाओं, बोलियों एवं उनकी संस्कृतियों को आत्मसात करने की वजह से हो पाया है। और यह काम साहित्य एवं अकादमी से बढ़कर हिन्दी फिल्मों ने किया है। जिसने इसे विभिन्न गैर हिन्दीभाषी क्षेत्रों से लेकर विदेशों में लोकप्रिय बनाया है।

फिल्मों और विज्ञापन ने इसे लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ ग्लैमर भी बनाया है। इंटरनेट पर हिन्दी के कई ब्लॉग और वेबसाइट अपने नये प्रयोग और तकनीक से खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। हाल में लीक से हटकर 'लप्रेक' जैसे साहित्य लिखे गये जिसे युवाओं ने  काफी पसंद किया। इलेक्ट्रॉनिक हिन्दी न्यूज मीडिया ने गैर हिन्दीभाषी लोगों के दरवाजे तक अपनी दस्तक दी है।

हिन्दी में ग्लैमर आ रहा है। अब यह गीत, सिनेमा, ब्लॉग और वेबसाइट के बाद यह हमारे साहित्य में भी दिख रहा है। विज्ञान, तकनीक, शोध की भाषा हिन्दी को बनाकर इसे और अधिक ग्लैमर छवि दी जा सकती है। इसे और अधिक गलैमर प्रदान करने के लिए राजनेताओं, अभिनेताओं, क्रिकेटर एवं अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के द्वारा हिन्दी को अपनाने की जरूरत है।


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